सरल है फूलों पे सोना
सरल है फूलों पे सोना काम , काँटों से यहाँ |किन्तु देखो किस मजे में जा रहा है कारवाँ ||ये मुसाफिर वे नहीं जिनको सहारा चाहिएसुनलो हमको बंदगी का बस इशारा चाहिएहै विदाई की ण रस्मे , प्यार का स्वागत कहाँ ||है न लेखा कौन साथी है या चल दिएदीप का जीवन है केवल...
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क्षत्रिय
स्व.श्री तन सिंह जी कलम से
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[19 Apr 2010 09:36 AM]



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