प्रेम का इस्तीफा..(मनोज तापस की कविता)
हाँ !मुन्ना भाई,आप ठीक कहते हैं-प्रेम से इस्तीफा नहीं दिया जा सकता.कमबख्त इस कलम से जब भी,प्रेम का इस्तीफा लिखने बैठता हूँ.तो लिख बैठता हूँ,प्रेम पत्र. कभी-कभी मन करता है,ढेर सारी गालियाँ लिख पोस्ट कर दूँ उस पते पर,लेकिन लिख बैठता हूँ,प्रेम कविता फिर.कल...
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मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
कविता जगत...
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[19 Apr 2010 09:11 AM]



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