महानगरीय चिड़ियाओं का दर्द !

अंधड़ ! प्रात: भ्रमण के उपरान्त बरामदे में बैठ बस यूँ ही शून्य को निहार रहा था कि सहसा नजर चिड़ियाओं का कोलाहल सुनकर सामने पार्क के एक छोर पर लड़ रही कुछ चिड़ियाओं पर जा टिकी। उनके व्यवहार से लग रहा था कि वे एक दूसरे को मरने-मारने पर उतारू है। बहुत देर तक उन्हें... [पूरी पोस्ट]
writer पी.सी.गोदियाल

tirchinazar

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[19 Apr 2010 07:22 AM]

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