किताबें मिली ,कुछ पढ़ीं कुछ ....अधपढ़ीं !

क्वचिदन्यतोअपि..........! मेज पर कुछ किताबें पडी हैं ..मतलब पूरी तरह पढी नहीं जा सकी हैं ..पढ़ ली गयी होतीं तो  अब तक शेल्फ में पहुँच चुकी होतीं ...विषय भी काफी डाईवेरसीफायिड है -वैदिक सूक्त संग्रह से लेकर आधुनिक  कविता संग्रह तक ....इनमे सभी में से कुछ न कुछ पढ़ चुका हूँ... [पूरी पोस्ट]
writer Arvind Mishra
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[19 Apr 2010 06:17 AM]

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