बड़े बेआबरू होकर
थरूर जी,जय श्रीराम । यह तो होना ही था । हमें तो पहले ही लग रहा था कि यह कढ़ी तो बिगड़ने वाली है । आप भले ही मंत्री पद के नशे में समझ नहीं पाए हों । मंत्री पद तो गया ही और इज्ज़त भी यदि आप उसे कोई काम की चीज़ समझते हों तो । खैर, अब मज़े से ट्विट्टर पर...
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joshi kavirai
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[19 Apr 2010 05:20 AM]



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