सामर्थ्य, सीमा और सवाल

महामूर्खराज की कलम से थी तो वो गर्मी की सुबह पर गर्माहट के नितांत अभाव के साथ। अचरज तो था इतना शीतल नमीयुक्त हवाओं का यह सुखद वातावरण आखिर पुरबइया हवा ने अधीरता और छटपटाहट के निर्वात को भर जो दिया था। 5-6 दिन पहले यह वातावरण गर्माहट से ओतप्रोत तो था और पछिया की शुष्कता ने इसे... [पूरी पोस्ट]
writer महामूर्खराज
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[19 Apr 2010 04:34 AM]

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