दिल में ईंटे हैं भरी, लब पै खुदा होता है !!!
मानवी इतिहास साक्षी है कि आजतक संसार में कोई जाति बिना धर्म के नहीं रही और न ही कभी आगे रह सकती है। धर्म की भूख तो इन्सान के ह्रदय में है। जिस प्रकार भूखा इन्सान कभी उचित या अनुचित खाने से भी पेट भर लेता हैं, उसी प्रकार कभी कभी जातियाँ या कोई व्यक्ति...
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पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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[19 Apr 2010 04:35 AM]



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