ये कैसी उल्फत जो हूँ दुखी मैं
" ये कैसी उल्फत जो हूँ दुखी मैं " तुम्हारी चाहत पर मर मिटी मैंये कैसी उल्फत जो हूँ दुखी मैं मुझे पता तब खता हुआ जब फिर कैसी रंजिश जो हूँ दुखी मैं मैं कैसे कह दूँ करूँ इबादत जफा मिले तो रहूँ दुखी मैं लगे तो रूह भी वफ़ा...
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Kusum Thakur
कविता
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[19 Apr 2010 03:55 AM]



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