नरेन्द्र जैन के नये संग्रह से तीन कवितायेँ
भाई-----(दिवंगत बड़े भाई के लिय)जहाँ तक छायाचित्र संबंधी समानता का प्रश्न हैबड़े भाई लगभग मुक्तिबोध जैसे दिखलायी देते थेचेहरे पर उभरी हड्डियाँ और तीखी नाकजीवन रहा दोनों का एक जैसा कारुणिकऔर विषमवह एक प्रतीक जो आया कविता मेंजहाँ होता रहा पुनरावलोकन जीवन...
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Ek ziddi dhun
नरेन्द्र जैन
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[19 Apr 2010 02:52 AM]



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