तुम हो न सके मेरे !
जिनकी हमें तलाश थी,वो इस तरह मिले,उनसे हुआ जो सामना ,हसरत से ना मिले।ख़्वाब-ओ-ख़याल क्या थे ,मिलने से उनके पहले,फूलों को थे तलाशते ,काँटे मुझे मिले।कल तक रहे जो हमदम, मेरे जनम-जनम के,जनम-जनम की बात क्या,दो पल भी ना मिले।इस ज़िन्दगी में क्या बचा,तनहाइयों...
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संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
शायरी
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[19 Apr 2010 00:45 AM]



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