किसके लिए, किसके लिए
लिखूँ किसके लिए, किसके लिएजिसे लुभाने की खातिर साक़ी बनमधुमय मधु गीतों को गाता रहाउसने मुझे विषघट समझ करदूर नीरव अधरों से कियारोऊँ किसके लिए, किसके लिएजग जो मुझे संताप देदर्द दे हृदय पर आघात देउनको समझता रहूँ अपनाक्यों अश्रु हँसी में ढाल लूँकरूँ, किसके...
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डॉ. राजेश नीरव
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[18 Apr 2010 23:26 PM]



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