...कभी वो मुस्कुराते हैं ,कभी वो रूठ जाते हैं
विकट गर्मी का मौसम चल रहा है। हर तरफ़ पारा उचकता जा रहा है। बकौल संजीत:दिन में बाहर भटको तो हवाएं जैसे जला डालना चाह रही हो, धूप जैसे पिघला देना चाहता हो और सूरज तो मानों अपनी तपिश की प्रचंडता दिखाने पर उतर आया हो। यह फोटो भी संजीत के ब्लॉग से ली गयी...
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अनूप शुक्ल
अनूप शुक्ल
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[18 Apr 2010 23:00 PM]



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