नाविक से

Unmanaa ले चल मेरी नौका पार !भव सागर में बही जा रही,नहीं किनारा कोई पा रही,सुख दुःख की झंझा में पड़ कर डूब रही मंझधार ! ले चल मेरी नौका पार !नाविक मुझे वही तट भाये,रहें जहाँ जग से ठुकराये,जहाँ बसा हो एक अनोखा पीड़ा का संसार ! ले चल मेरी नौका पार ! मैं भी उनमें... [पूरी पोस्ट]
writer Sadhana Vaid
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[18 Apr 2010 21:57 PM]

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