कहानी एक बुढ़िया की(लोक कथा पर आधारित)

नन्हा मन एक बुढ़िया थी बड़ी लालचीपाली थी उसने मुर्गीजो नित सोने के अंडे देतीबुढ़िया उनको बेचा करती।एक दिन उसके मन में आयामुर्गी देती रोज है अंडेदेखूं इसका पेट फ़ाड़करकितने हैं सोने के अंडे। खींच के मारा उसने डंडामुर्गी हो गयी टेंबुढ़िया रोई और चिल्लाईहाय क्या कर गयी... [पूरी पोस्ट]
writer JHAROKHA

कहानी एक बुढ़िया की

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[18 Apr 2010 22:13 PM]

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