वादा कर के मुकर गया कोई

अनुभूति कलश वादा कर के मुकर गया कोई, आँखों में अश्क दे गया कोई। दे दीं हर धड़कनें जिसे हमने, साँसों का क़त्ल कर गया कोई । रोज़ आते थे जो हमारे दर पर, गर्दिश-ए-वक़्त छल गया कोई । नूर-ए-दिल था जो कभी अपना, आज बेनूर बन गया कोई । दिल की गलियों में जो विचरते थे, बिन कहे दिल... [पूरी पोस्ट]
writer ramadwivedi

गीतvada karke mukar gaya

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[18 Apr 2010 20:53 PM]

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