सफ़र
न जाने किस बात पे,वो मुझपर कहर बरसता चला गया।न मिले जब उसे मेरी आंखों में आँसूं,वो और सितम ढाता चला गया।वो कहते हैं कि, हम कहते बहुत हैं।अब उन्हें क्या बताएं कि,जब नब्ज़ तक खामोश हो धडकनों की,तो हर लम्हा आखिरी सा लगता है। खत्म होता नहीं ये सिलसिला,एक कदम...
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[18 Apr 2010 16:13 PM]



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