…जिन्दगी ऐसी नदी है जिसमें देर तक साथ बह नहीं सकते
कल दिन भर पुराने कैसेट खोजकर कवितायें सुनी। स्व. रमानाथ अवस्थी जी की एक कविता मैं बहुत दिनों से खोज रहा था। कैसेट मिल नहीं रहा था बहुत दिनों से। कल एक बार फ़िर खोजा तब मिल ही गया। इस कैसेट में स्व. रमानाथ अवस्थी जी की कविता : आज इस वक्त आप हैं [...]...
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फ़ुरसतिया
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[18 Apr 2010 16:23 PM]



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