उठाया मैंने कदम 'संशयवाद' से 'आस्था' की ओर . . . . . . मेरे इस नये-नवेले धर्म में आपका भी स्वागत है !!!

सुनिये मेरी भी.... ...मेरे संशयवादी व नास्तिक मित्रों,हैरानी जरूर हो रही होगी आपको...क्या करता मैं बेचारा ?चारों तरफ तो धर्म का ही बोलबाला है।धर्म का महातम्य इतना है...यह जिन्दा रहने के लिये आवश्यक है!अब मैंने भी खूब सोच-समझ करसभी धर्मों का अध्ययन करअच्छे बुरे का पूरा-पूरा... [पूरी पोस्ट]
writer प्रवीण शाह
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[18 Apr 2010 15:18 PM]

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