कविता: घड़ी

BAL SAJAG घड़ीसमय हमें बतलाती है,नाम घडी कहलाती है। जब घडी गलत हो जाता है,तब समय गलत हो जाता है।आगे करो या पीछे घड़ी,असमंजस में पड़ता आदमी। जब भी जल्दी हो देता काम,ऐसे काम का यही है दाम।समय हमें बतलाती है,नाम घडी कहलाती है।लेखक: सोनू कुमार, कक्षा ८, अपना घर... [पूरी पोस्ट]
writer BAL SAJAG
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[18 Apr 2010 14:13 PM]

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