नियति

Bharat kaa Loktantra न्यायालय में न्याय पानेजो भी जाता हैन्याय मांगते मांगतेबूढा अश्व सम हो जाता है ,आँखें भरिया जाती हैकान बहरा हो जाता हैदन्त विहीन मुखहिप्पो कि भांति मुस्कुराता है ,न्यायाधीश झूठे सच्चेदोनों को देखता हैकौन सच्चा है कौन झूठासमझ नहीं पाटा है,इसी तरह चलता... [पूरी पोस्ट]
writer K.P.Chauhan
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[18 Apr 2010 14:02 PM]

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