चलिए यात्रा आगे शुरु करते हैं ..

साहित्य योग चलिए यात्रा आगे शुरु करते हैं ..(5)दे दे बाबा भूखे को कुछ दे दे. जोड़ी सलामत रहे. दो दिन से कुछ खाया नहीं..दे बाबा यार मोटे अब ये कौन सी बला आ गयी. ससुर चैन से साँस भी नहीं लेने देवत.हाँ...ससुर जैयेसे झपकी लागत है कोई ना कोई टपक परत है.सही कहत हो... [पूरी पोस्ट]
writer Tej Pratap Singh
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[18 Apr 2010 11:17 AM]

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