तुरई पुराण…

मेरे विचार, मेरी कवितायें ४ दिन पहले तुरई/तरोई खाने का बहुत मन कर रहा था… बनाये भी, खाये भी और साथ मे बज़ पर बजबजाये भी… ससुर (अजदक बाबा का फ़ेव शब्द) अब तक कोई न कोई उसपर टुनटुनाये जा रहा है…   आप भी इस तुरई पुराण का लुत्फ़ उठाईये, टुनटुनाईये/बज़बज़ाईये और देखिये की छोटी छोटी... [पूरी पोस्ट]
writer Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय)

कुछ एं वें ही

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[18 Apr 2010 10:45 AM]

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