नैनन पड़ गए फीके

एक प्रयास सखी री मेरे नैनन पड़ गए फीकेरो-रो धार अँसुवन की छोड़ गयी कितनी लकीरेंआस सूख गयी प्यास सूख गयीसावन -भादों बीते सूखे सखी री मेरेनैनन पड़ गए फीके बिन अँसुवन  के अँखियाँ बरसतीं बिन धागे के माला जपती  हो गए... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[18 Apr 2010 10:43 AM]

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