कसक कलम की
मिश्रा जी की कलम से तराशी पहली चंद पुस्तकों की भारी सफलता और मुनाफे के मद्दे्नजर जैसे ही प्रकाशक महोदय को उनकी नई पुस्तक के बारे मे मालूम हुआ तो वो अपने सभी जरूरी कामों को भूलकर मिश्रा जी के घर के चक्कर लगाने लगे। किसी न किसी बहाने कभी थोड़ी बहुत मिठाई...
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Jolly Uncle
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[13 Apr 2010 02:17 AM]



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