zindggii
हालात से गुज़र करचटकती रूह कडवी रही बहुत......जिस्म को ज़ी भर के सहलाती रही चाँद की मीठी सी परछाई.... -----आंच------...
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aanch
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[18 Apr 2010 03:29 AM]



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