एक गज़ल : उम्मीद-ओ-आरज़ू मिरी.......

उर्दू से हिंदी उम्मीद-ओ-आरज़ू मिरी दमसाज़ बन गई इक सोज़-ए-आशिक़ी बनी,इक साज़ बन गई ! सौदा न कम हुआ सर-ए-मक़्सूद-ए-आशिक़ी क्या इन्तिहाये-आरज़ू आग़ाज़ बन गई ? यारों !ये क्या हुआ कि सर-ए-बज़्म-ए-ज़िन्दगी? जो भी ग़ज़ल कही ,शरार-अन्दाज़ बन गई ! कैसी तलाश ,किस की तमन्ना,कहाँ की दीद ख़ुद... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द पाठक
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[18 Apr 2010 08:34 AM]

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