खामोश दर्द
ख़ामोशी भी दर्द से रिश्ता जोड़े है पछताए है,चुप चुप रह कर चुपके चुपके,घुल घुल कर मर जाए है।हूक सी उठती है दिल में तो आँखें खून रुलाती हैं,प्यास अगर जन्मों की हो तो प्यासी ही रह जाती है,समझ के सब कुछ भी न समझे,न समझ के भी समझाए है।कांच के किरचों सी आँखों...
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Nihar Khan
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[18 Apr 2010 07:24 AM]



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