कोंपल की करुण कहानी

स्वप्नलोक शाखा में छिप सर्दी काटी,लम्बा समय बिताया ।कोंपल ने जब बाहर देखा,उसका मन हरषाया ॥जाड़ा मिला नदारद उसको,बसन्त का मौसम था ।दिन में कुछ गरमाया सा था,रातों को कुछ नम था ॥अवसर यह अनुकूल जान,उसने बाहर आने का ।किया पैक सामान सभी,इस दुनिया में लाने का ॥परमीशन पेढ़... [पूरी पोस्ट]
writer विवेक सिंह
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[18 Apr 2010 07:09 AM]

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