दूसरा आदमी....
दूसरा आदमी...मैं खाना बनाने की तैयारी करने लगा। पीछे से माँ ज़िद्द करने लगी ‘नहीं खाना मैं बनाऊंगी’। इस युद्ध में जीत माँ की ही होनी थी... पर मैं ज़िद्द करके टमाटर, प्याज़, हरि मिर्च काटने लगा।’आप इतनी दूर से सफर करके आई हो। खान आप ही बनाना, मैं बस...
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मानव
कहानी...
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[18 Apr 2010 06:46 AM]



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