आदमी की खरीद फरोख्त जारी है
सब बिकता है। इतिहास बताता है की बादशाह गुलाम खरीद क़र उनको शतरंज की मोहर तरह चलते थे। वो पलट वार वाला खेल जिसमें एक हत्या तय थी। अपने मनोरंजन के लिए तवायफ , पहलवान, तीतर तोते सब खरीद के लाये जाते हैं । ना मशाल यूँ छिड गया की कल्लन कियां ने वह महिला जो...
[पूरी पोस्ट]
rajkumar jha
14
2
1
1
1
[18 Apr 2010 04:25 AM]



Shuffle








