जेल में पढ़े जो चेहरों के भाव ...!!!
हसरतों को जहाँ रोज, मरते-बेहाल देखा है ,बे-मतलब अपना चेहरा, लाल करते देखा है । जो करके आये हैं , उसका उनको ख्याल है,मै तो था बे-कसूर .!ये मलाल करते देखा है । करें भी क्या इनके बस में, है भी नही ,यादों के नश्तरों को, हलाल करते देखा है ,। कुछ ने तो कर लिया...
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कमलेश वर्मा
कैदी
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[18 Apr 2010 03:50 AM]



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