जेल में पढ़े जो चेहरों के भाव ...!!!

के.सी.वर्मा हसरतों को जहाँ रोज, मरते-बेहाल देखा है ,बे-मतलब अपना चेहरा, लाल करते देखा है । जो करके आये हैं , उसका उनको ख्याल है,मै तो था बे-कसूर .!ये मलाल करते देखा है । करें भी क्या इनके बस में, है भी नही ,यादों के नश्तरों को, हलाल करते देखा है ,। कुछ ने तो कर लिया... [पूरी पोस्ट]
writer कमलेश वर्मा

कैदी

views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
5
[18 Apr 2010 03:50 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix