कुरआन शरीफ पर कुछ भी लिखने को मेरी कलम नहीं चलती -सतीश सक्सेना
विधर्मियों के लिए, हज़ारों वर्ष पूर्व की परिस्थितियों में लिखी गयीं , अन्य धर्मों की पवित्र पुस्तकें पढ़कर, उनकी मज़ाक बनाना बेहद आसान हो जाता है , और आजकल यह कुछ तथाकथित विद्वानों की मेहनत के कारण और भी आम होता जा रहा है ! मैंने जब ब्लागिंग शुरू की थी...
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सतीश सक्सेना
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[18 Apr 2010 02:43 AM]



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