ई मेल क्या कह रही हैं ? (अविनाश वाचस्पति)
ई मेल को मत मानें सत्य वचनइनमें भी मिलावटी माल पक रहा हैचाहे इस पके से नहीं हो रहा नुकसानपर मिलावट खुद ही जुर्म है श्रीमान।दैनिक हिन्दी नवभारत टाइम्स से साभार...
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अविनाश वाचस्पति
ई मेल
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[18 Apr 2010 02:20 AM]



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