क्या वास्तव में धर्म एक अनावश्यक ढोंग है ?

धर्म यात्रा धर्म एव हतो हन्ति धर्मोरक्षति रक्षत:। तस्माद धर्मो न: हन्तव्यो मा नो धर्मो हतो वधीत ।। प्राचीन कल के किसी ऋषि का यह श्लोक उस समय के मनुष्यों के भावों को भलीभान्ती व्यक्त करता है। इसका तात्पर्य यह है कि "मारा हुआ(नष्ट किया गया) धर्म ही मनुष्य के नाश का... [पूरी पोस्ट]
writer पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
views
41
upvote
6
downvote
0
rating
6
comments
11
[18 Apr 2010 02:28 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix