संत कबीर वाणी-खोटी हाट में गांठ का हीरा न खोलें (sant kabir vani-heera aur hat)
हीरा परखै जौहरी, शब्दहि परखै साध।कबीर परखै साधु को, ताका मता अगाध।।संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि हीरे की परख जौहरी करता है तो शब्द की परख साधु ही कर सकता है। जो साधु को परख लेता है उसका मत अगाध हो हो जाता है। हीरा तहां न खोलिए, जहं खोटी है हाट।कसि...
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दीपक भारतदीप
hindu dharma
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[18 Apr 2010 02:10 AM]



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