पतंजलि योग दर्शन-प्राणायाम से मन और विचार दृढ़ होते हैं (patanjali yog darshan-pranayam aur man)

शब्दलेख सारथी प्रच्छर्दनविधारणाभ्यां वा प्राणस्य।हिन्दी में भावार्थ-प्राणवायु को बाहर निकालने और अंदर रोकने के निरंतर अभ्यास चित्त निर्मल होता है।विषयवती वा प्रवृत्तिरुपन्न मनसः स्थितिनिबन्धनी।।हिन्दी में भावार्थ-विषयवाली प्रवृत्ति उत्पन्न होने पर भी मन पर नियंत्रण... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

yog sadhna

views
6
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[18 Apr 2010 01:45 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix