बढ़ते तापमान में गुलदाउदी, गेंदा और गुलाब

मौन के खाली घर मे-                                       ओम आर्य इसमें कोई अतिरंजन या रोमांटिसिज्म नहीं हैजब मैं कह रहा हूँकि आजकल रोज जुड़ रहा है थोड़ा-थोड़ा प्यारहमारे बीचपहले से जमा होते प्यार मेंरोज बढ़ रहा है प्याररोज खिल रहे हैंगुलदाउदी, गेंदा और गुलाब हमारे बीचबढ़ते प्यार के साथयह एक अलग सा अनुभव है मेरे... [पूरी पोस्ट]
writer ओम आर्य
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[18 Apr 2010 00:59 AM]

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