कविता: वतन

BAL SAJAG इस वतन से सबको प्यार है..........हम वतन के तुम वतन के,इस वतन से सबको प्यार है। हिन्दू लड़ते मुस्लिम लड़ते,क्यों इनके बीच भेद की दिवार है। दिवार ये है किसने बनाई,ये जानना हम सबका अधिकार है। जो न जाने जो न समझे,उसका जीवन बेकार है। हम जीते है हम मरते है,नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer BAL SAJAG
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[18 Apr 2010 00:53 AM]

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