है जान वहीं अफ़साने में...!
चर्चा है दो ही बातों का, मेरी उम्र के सारे फ़साने मेंकुछ दिन तेरी राहों में गुजरे, कुछ बीत गए मयखाने मेंदुखड़ों का ज़िक्र बयां ग़म का, दिलचस्प है यूं तो किस्सा मेराआया है जब भी नाम तेरा, है जान वहीं अफ़साने में।==========================================नसीम...
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Dr. Chandra Kumar Jain
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[18 Apr 2010 00:11 AM]



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