मेरा अपना ही क्रंदन है और अकेला मैं हूँ

हिन्द-युग्म मन का गहरा खालीपन है और अकेला मैं हूँ जैसे कोई निर्जन वन है और अकेला मैं हूँ जिसको सुनकर रातों को मैं अक्सर जाग गया हूँ मेरा अपना ही क्रंदन है और अकेला मैं हूँ मेरे घर के आस पास ही रहना चाँद सितारों मेरी नींदों से अनबन है और अकेला मैं हूँ पक्की करके... [पूरी पोस्ट]
writer नियंत्रक । Admin

ravindra sharma ravi

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[18 Apr 2010 00:11 AM]

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