हिन्दू धर्मं, हिन्दू धार्मिक गुरु और उनका आश्रम
धर्मं ने शुरू से ही इंसानों को बांटा है; मैं हिन्दू, तू इसाई. और इसके अन्दर भी जाती; मैं फ़लाने जात का और तू तो फ़लाने जात का. इसकी शुरुआत उत्तरवैदिक काल में हुई थी. जात-पात और धर्म उत्तरवैदिक काल कि ही दें हैं. इसीने समाज को कुछ इस तरह से बांटा...
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Vishal Kashyap
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[11 Mar 2010 20:46 PM]



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