खुली जुल्फों के हसीं साये में ...

9th Dimension's Base  खुली जुल्फों के हसीं साये में .......ऐ काश की ये दिल खामोश हो जाये आपकी निगाहों में .........कुछ ख्याल थे, इस दिल के; जो जेहेन तक ही रह जाते .........कुछ ख्वाब थे मेरे जो, मुझमे ही सिमट कर रह जाते ...........ना तो तेरी यादों का खुमार ही मुझपे होता... [पूरी पोस्ट]
writer Vishal Kashyap
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[16 Apr 2010 20:33 PM]

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