नवान्न

ज्ञानदत्त पाण्डेय की मानसिक हलचल वैशाखी बीत गई। नवान्न का इन्तजार है। नया गेहूं। बताते हैं अरहर अच्छी नहीं हुई। एक बेरियां की छीमी पुष्ट नहीं हुई कि फिर फूल आ गये। यूपोरियन अरहर तो चौपट, पता नहीं विदर्भ का क्या हाल है? नवान्न के बोरे पर बैठी, सहेजती मेरी पत्नीजी और गेंहूं के दाने परखते... [पूरी पोस्ट]
writer ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey

surroundings

views
24
upvote
5
downvote
0
rating
5
comments
24
[17 Apr 2010 18:30 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix