चाँद कैसा लगता है ?

अथाह... एक दिन मैं छत पर आया ,चाँद को चमकता हुआ पाया ,अचानक मेरे जहन में ये सवाल कौन्धां,ये चाँद कैसा लगता है ?ढूँढा तो बहुत कुछ पाया।बच्चा "मामा जैसा लगता है "शायर "शायरी जैसा लगता है"कवि "कल्पना जैसा लगता है "विद्यार्थी "पृथ्वी जैसा लगता है"चकोर "महबूब जैसा... [पूरी पोस्ट]
writer राजेन्द्र मीणा

मेरी कविताएँ

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[14 Apr 2010 13:00 PM]

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