भाभी तेरे इस भोले चेहरे में , मेरी माँ का चेहरा दिखता है।

अथाह... मैं दिल्ली में जहाँ रहता हूँ , उसी मकान में मेरे नीचे वाली मंजिल पर एक परिवार रहता है, बहुत सभ्य लोग है , उन्ही में से एक है , ' गीता भाभी ' ...बहुत ही सुन्दर और सुशील औरत है। इतनी गरमी के दिनों में भी मेरे पास पंखा नहीं है ..इसलिए जब देखो पंखा लाने को... [पूरी पोस्ट]
writer राजेन्द्र मीणा

मेरी कविताएँ

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[16 Apr 2010 13:31 PM]

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