ये तीन शब्द
जब भी खोलता हूँ जीवन के, शब्दकोष को ,ये तीन शब्द ' कहाँ ,क्यों, कैसे ' मुहं फाड़कर चले आते हैं ।जब भी बोलता हूँ समय से ,जीवन है यहीं ,ये तीन शब्द ' कहाँ ,क्यों ,कैसे ' यूँ दौड़कर चले आते है ।जब भी तोलता हूँ स्यंव को ,सत्य की तुला से ,ये तीन शब्द ' कहाँ...
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राजेन्द्र मीणा
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[17 Apr 2010 14:33 PM]



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