vikram7
मनु दाश जी उडिया के जाने माने कवियों में से एक है। अग्रेजी, उडिया के अति संवेदनशील कवि की हिन्दी रुपान्तरण की प्रथम पुस्तक ''खैर, अगली वार फिर आऊँगी'' पढने का अवसर मिला । प्रस्तुत है मनु दाश जी की एक कविता। कैंसर वार्ड में दीवाली कोई मोमबत्ती जलाई नहीं...
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[17 Apr 2010 14:12 PM]



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