कविता: आदमी कहलाने लायक नहीं हूँ

BAL SAJAG मै एक आदमी हूँ ......मै एक आदमी हूँ,लेकिन आदमी कहलाने लायक नहीं हूँ ।मेरे पास दिमाग है,लेकिन वह बेकार है। उन्नति तो हमने बहुँत किया,मगर समाज को कुछ न दिया। इस हरी भरी दुनिया को,छिन्न - भिन्न कर गया। एक दिन ऐसा आएगा,दुनिया खत्म हो जायेगा। इसका कारण एक... [पूरी पोस्ट]
writer BAL SAJAG
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[17 Apr 2010 13:43 PM]

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