मैं भुला नाम अपना भी

TAPASHWANI किताबों को लगा दिल से,वो पहली बार जब आई |मैं भुला नाम अपना भी,चली कुछ ऐसी पुरवाई |वो चलना यार झुक कर के,हवा के वेग के जैसा |मैं भुला नाम अपना भी,वो जब भी सामने आई |बहुत चंचल हुआ करता था,मैं भी उन दिनों में पर |नहीं कुछ बोल पाया मैं,वो जब भी सामने आई |... [पूरी पोस्ट]
writer Tapashwani Anand
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[17 Apr 2010 13:06 PM]

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