इस लज्जित और पराजित युग में - अच्युतानंद मिश्र
इस लज्जित और पराजित युग मेंदेखिए तो कैसे हहाकर बढ रहा हूं मैंदेखिए तो अपने घर के चारों तरफकैसे उगा लिया है हरापन मैंनेमेरे बच्चे का विज्ञापनी चेहरा देखकरमेरे पडोसी के बच्चे को इंसान का बच्चामानने की भूल नहीं कर सकेंगे आपइस लज्जित और पराजित युग मेंअभी...
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[17 Apr 2010 10:27 AM]



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